सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

वक़्त के वो कतरे


















वक़्त के वो कतरे
जो यादों के जंगल में छूटे था
आज भी साये की तरह मंडराते है
मुझे तेरी याद दिलाते है ...

याद है वो नारंगी सी शाम
जब सूरज झील की सीढिया उतर रहा था
कुछ करुण सा भाव भर रहा था
वो आँखों में गीलापन औ' निशब्द से पल
आज बहुत कुछ जताते हैं
.... मुझे तेरी याद दिलाते है

आज भी सूरज मध्धम हो कर देख रहा
शायद उन्ही पलों को संजो रहा
तुम नहीं हो इस शाम यहाँ
आँखों में वही नमी बिछड़े हुये वही कुछ पल
मेरे घर का रास्ता दिखाते है
.........मुझे तेरी याद दिलाते हैं...

तेरा साथ मिलना समय को रास नहीं था
उसके फैसले से तू भी उदास नहीं था
जो थोड़े पल मैंने काट कूट के बचाए थे
वही पल अब मुझे जीना सिखाते है
.......मुझे तेरी याद दिलाते है

3 टिप्‍पणियां:

Na ने कहा…

rashmi, it's so poignant, specially the last lines- uskey faisley se tu bhi udaas nahin tha!
words stayed long after reading it

मीता . ने कहा…

वक़्त के वो कतरे
जो यादों के जंगल में छूटे था
आज भी साये की तरह मंडराते है ..... दिल छूने वाली पंक्तियाँ .

अनुपमा पाठक ने कहा…

जो थोड़े पल मैंने काट कूट के बचाए थे
वही पल अब मुझे जीना सिखाते है
बहुत खूब!

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