सोमवार, 30 जनवरी 2012

चेहरा - Facets of Life .

                                                          

एक गीत है जो बचपन से ले कर आज तक ज़ुबां को याद है ... नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जायेगा ... ये और बात है कि तब समझ नहीं आता था कि चेहरा बदल कैसे सकता है भला ... उम्र के मंझले पड़ाव पर खड़े हो कर समझ आता है कि चेहरे होते ही बदलने के लिए हैं ... खैर छोडिये ! ये बड़ा उदास सा टॉपिक है.
                 
                 कभी सोचा है कि जिसे हम चेहरा कहते हैं उस में कितनी कहानियां छुपी हैं .... आँखों की, होठों की, आरिज़ों की, झुर्रियों की .... सब के अपने-अपने किस्से , अपनी-अपनी यादें ...अपना-अपना सुख, अपना-अपना दुःख .... वो आंसू जो इस चेहरे से हो कर गुज़रे थे, अब तक कहाँ निकल गए होंगे ? .... बड़ा मुश्किल है लफ़्ज़ों में बयान करना एक चेहरे को ... चेहरा जो एक ऎसी किताब है जिस में तमाम उम्र उतर आई है हर्फों की शक्ल ले कर ....

                कुछ चेहरे इस बार चिरंतन में आप से मिलने आये हैं ....देखिये आप किसी को पहचान पाएं शायद ...

                                -  पुष्पेन्द्र वीर साहिल  
                                                                                      
( Title picture - Imraan khan Mewaati .)
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तुम्हारा  चेहरा .
                                                                                                       

तुम्हारे चेहरे के 
निर्मल दर्पण में 
मेरा अपना प्रतिबिम्ब 
' देव - निर्माल्य ' सा 
निष्पाप - निष्कलुष 
नज़र आता है .


तब मेरी कुआंरी आत्मा 
तुम्हारी दृष्टि के परस से 
सिहर- सिहर , सिमट आती है . 


                         - दिनेश  द्विवेदी .
                            ( ' पारे की तरह ' से )
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चेहरा .                      






अब भी मेरे सिरहाने पर उम्मीद रक्खी है 
जो राह भटक कर 
रात के अंधेरों में चली आती है मेरे सपनों में ...    

कभी बन कर जुगनूं, कभी बन कर तितलियाँ    
उजालों के काफिले लिए, रंगों का कारवां बनाकर 
हजारों मन्नते समेटे चाहत की पिटारी में 
जिसे खोल कर बिखेर देती है वो मेरी वजूद पर .

मैं करवट बदलता हूँ , सपने रंग बदलते हैं 
धानी और भी गहरा हरा हो जाता है 
रंग मुस्कुराते हैं और मुझसे बात करते हैं 
गोते लगता हूँ जब मैं नींद के समंदर में .

अक्सर शरारत वो ये मेरे साथ करते हैं 
ना नींद टूटती है, ना उम्मीद 
और रंग बदलते हैं रूप 
जब नींद के स्याह छलावे पर उतरती है तड़प की धूप .

कभी गालों पर सुर्ख रंगत बन कर उतरते हैं 
कभी आँखों में सवेरा बन बिखरते हैं 
कभी होंठों पर ओस बन कर उतर जाते है 
कभी बन कर तेरा चेहरा मुस्कुराते हैं 
कभी बन कर तेरे गेसू हवाओं को जान देते हैं ...

सपने ही बस ... अब तेरे चेहरे को पहचान देते हैं .
                                 
                        - स्कन्द .


( Painting : Mrs Raina Swaroop  http://www.reinart.co.in/ )
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The  Crust .



I am layers upon layers upon layers .           
How can you ever fathom ?
You 
who believes in the crust .


Sometimes ,
the hidden layers emerge ;
baffling you . 
But the crust persists .
What will you say ,
if I tell you the crust you know so well ,
is not me at all !


The mask which 
you , me , everybody wears ,
this quiet , cold crust ,
to hide scorching , seething lava .
This intact sane face
hiding splintered , fragmented inside .


I would rather 
you stay happy in your belief .
I peeled the layers .
See , I've burned my hands .


                                  - Meeta .
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चंद चेहरों का  याद रह जाना ...


                                         
                                                 
चंद चेहरों का  याद रह जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए
बारहा ये सवाल उठ जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए

मौसमों की तरह बदल जाना, दोस्तों ने कहाँ से सीखा है
दोस्तों के लिए बदल जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए


मानता हूँ सिवाय तल्खी के, कुछ भी दिल में तेरे नहीं बाकी
तल्खियों की तरह जिए जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए


हौसलों का करार है मुझसे, उम्र भर साथ मेरे रहने का
बदगुमां इस कदर रहे जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए


आज फिर शाम से जली शम्मा, आज फिर रात भर सुलगना है
रात-भर इस तरह जले जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए .

                            - पुष्पेन्द्र वीर साहिल .
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चेहरा बारिश , चेहरा धूप .

चेहरा बारिश , चेहरा धूप .                              
चेहरा रंगत , चेहरा रूप .
चेहरे में बरसों की छाया ,
चेहरा एक छलावा ... माया .

भीड़ में भी चेहरा एकाकी ,
चेहरा नीड़ खोजता पाखी .
चेहरा चेहरा ढूँढा जिस को ,
चेहरा चेहरा पाया उस को .

चेहरा तेरा , चेहरा मेरा .
चेहरे के ऊपर भी चेहरा .
चेहरे जो चुप भी रहते हैं ....
गौर से सुनना कुछ कहते हैं .

                  - तोषिता .

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Dressing up each morning
Is a rather easy task
But what eludes decision
Is to hide under which mask?

Which face is better?
The kind loving wife
So that you can’t see
Her churning internal strife
Is it the sweet mother’s?
The epitome of giving
As she hides her need
To be human in receiving
Shall I wear the rotund face?
Of the well provided life
So that no one can guess
As the snakes of debt strike
Or wouldn’t it be better
If my face wore a dream
Subtly hiding my  weakness
As nightmares make me scream
Will you love me better?
If I donned a poet’s face
And ignored the mundane
Under words full of grace
Am I supposed to look?
Like an angel in disguise
To delude you into ignoring
The devil in my eyes?

These questions are unending
Till the day I finally decide
I have to be just myself
Not the image in your eyes

I am what my beliefs are
And I know the real me
Is how I evolve each day
Not the face you want to see .


sadhana .

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इनका चेहरा कोई नहीं होता .

एक माँ की जगी-जगी रातें  
जिनको आराम हो चला था कुछ
बेटा जो हो गया जवां उसका 
उम्र भर अब रहेंगी जागी ही                             

एक बहना के हाथ की राखी
चावलों में गुंथी हुई रोली 
बेवजह राह तकती हैं किसका 
उम्र भर इंतज़ार ही होगा

एक तस्वीर हाथ में थामे
कौन है जो खड़ी है खिड़की पे
जुल्फ वीरान, आँख रोई सी
अच्छा, इसका ही ब्याह होना था !

याद कर चौड़ी छाती बेटे की
पिता की आँख जो चमकती थीं 
बुझ गयीं हैं सदा सदा के लिए  
उनमें अब रोशनी नहीं होगी

पूछते क्यूँ हो तुम वजह इसकी 
तुमने शायद खबर नहीं देखी 
आज अखबार में जो छाई है
एक सिपाही की लाश आयी है.... 

ऐसी लाशों का नाम क्या लेना
तुमको उसके सगों से क्या लेना
चंद मेडल, मुआवजे, पेंशन 
इतना काफी है, और क्या देना

सियासती मसअला वो सीमा का 
इनके मरने से हल नहीं होता
मोहरे हैं, शहीद हो कर भी 
इनका चेहरा कोई नहीं होता

फिर भी क्यूँ आँख में खटकती है
पहले ही पेज पे जो आयी है
आज फिर से वही छपी है खबर
एक सिपाही की लाश आयी है .......
                  - पुष्पेन्द्र वीर साहिल . 
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प्यार .                                            
मुझे लगता नहीं 
कि प्यार चेहरों से भी होता है ...
या आँखों से ,
या होठों से ...
मगर हाँ ,
रूह से होता है 
इस पर एक यकीं सा है .


तभी तो 
मां के चेहरे पर 
वो पड़ते उम्र के साए ,
वो धुंधलाती हुई आँखें ,
वो बालों की सुफैदी भी 
कहाँ कोई फर्क लाते हैं !

मैं जब भी देखती हूँ 
बस मुझे इक नूर दिखता है .

और वो नूर जब 
उसकी निगाहों से बरसता है ;
मेरे दिल में उतरता है .
मुझे भी पाक करता है .

मैं उस को प्यार कहती हूँ .

                      - मीता .
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नक़ाबें. 

नीली, पीली, हरी, गुलाबी
मैंने सब रंगीन नक़ाबें
अपनी ज़ेबों में भर ली हैं
अब मेरा चेहरा नंगा है
बिल्कुल नंगा !
अब
मेरे साथी ही
मुझ पर
पग-पग
पत्थर फेंक रहे हैं
शायद वह
मेरे चेहरे में अपने चेहरे देख रहे हैं
(निदा फ़ाज़ली)
( Nazm courtesy Leena Alag )
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आज के विषय से सम्बंधित उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की एक बेहतरीन ग़ज़ल उन के एल्बम रिफाक़त से  प्रस्तुत है :
' सब का चेहरा तेरे जैसा क्यों है ' ...


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आपसभीको'गणतंत्र दिवस' केबासठवी वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनायें
जय हिंद जय भारत .
                              - चिरंतन.

.

14 टिप्‍पणियां:

Reena Pant ने कहा…

नए रंगों के साथ सुंदर अभिव्यक्तियां

पुष्पेन्द्र वीर साहिल ने कहा…

Thanks Reena ji.

Leena Alag ने कहा…

"CHEHRAA"...a road map to the soul...intersecting paths which if not properly grasped often mislead than help reach our destination...but chehraa agar interesting ho to one definitely feels an urge to venture further..."Chirantan" ka yahi chehraa hai pushpendra ji ki introduction...it lures the reader into deeper recesses...today's compositions reflect different facets of life but uncannily they all convey the same message that what we see is often what we should NOT believe..that the face is but a facade...
"raston ke naam...waqt ke chehray badal gaye...ab kya bataayein kisko...kahan chod aaye hain"...

all our lives we spend luking for that perfect face that befits our imagination and a soul to match with it...but life spares no one...

"salwatein hain mere chehray pe to hairat kyun hai....zindagi ne mujhay tumse kuch zyaada pehnaa"....

all the compositions are extremely beautiful...but just a few lines stuck in the heart are.....

"सपने ही बस ... अब तेरे चेहरे को पहचान देते हैं ."

"The mask which
you , me , everybody wears ,
this quiet , cold crust ,
to hide scorching , seething lava .
This intact sane face
hiding splintered , fragmented inside"........

"हौसलों का करार है मुझसे, उम्र भर साथ मेरे रहने का
बदगुमां इस कदर रहे जाना, कितना लाज़िम हैं ज़िन्दगी के लिए"....

"चेहरे जो चुप भी रहते हैं ....
गौर से सुनना कुछ कहते हैं"....

"सियासती मसअला वो सीमा का
इनके मरने से हल नहीं होता
मोहरे हैं, शहीद हो कर भी
इनका चेहरा कोई नहीं होता"....

"वो नूर जब
उसकी निगाहों से बरसता है ;
मेरे दिल में उतरता है .
मुझे भी पाक करता है .

मैं उस को प्यार कहती हूँ".....

sadhana ji,i cannot quote any lines of your poem today...because your poetry is the face of every woman...every home maker...every mom...it is BEAUTIFULLLLLLL!....all i can say is...

"roz tanhaaiyon mein ek chehraa...toltaa hai mujhay taraazu sa"....

Dinesh ji ki poetry is beyond words...and adding a video to the blog is indeed the most novel,innovative and amazing idea....:)))))

The Master..."Neelee, peelee,hari,gulaabi...mainay sab rangeen naqaabein...apni jaybon mein bhar li hain...ab meraa chehraa nangaa hai...bilkul nangaa...Ab!mere saathi hi...mujh par...pag-pag...paththar phenk rahe hain...shaayad woh...mere chehray mein apnay chehray dekh rahe hain...."
-Nida Fazl

meeta ने कहा…

@Reena di - Thanks .

@Leena - Thanks a ton . What a beautiful nazm by Nida Fazli ji you have shared with us !!

Nandita Pandey ने कहा…

Wish I had the time to write it earlier...n=but better late than never... :) :)
wrote after a long hiatus... Hope you like it...Enjoy!..

चेहरा - 1

सुबह कि धूप का एक पुलिंदा ..
जब गिरता है तेरे चेहरे पर.. ..
मिचमिचाती आँखों के बीच ..
मासूम से इस चेहरे पर
खिल जाती तब , अद्भुद एक मुस्कराहट ...
दीप्तमई कर देती है वो , स्याह सी
मेरी इस ज़िन्दगी के अंधियारे को ...!

हर रोज़ ,
रात के साए में लिपटे ,
अनसुलझी सी पहेली से ,
मेरी परछाई के ये क्षण ..
घुलते - मिलते..,उधड़ते -बुनते
ये पल ..
इंतज़ार मैं बैठे रहते हैं ,
फिर एक और सुबह का..
जब धूप का एक पुलिंदा ,
आ बैठेगा फिर तेरे चेहरे पर ..

तेरी इस मासूम सी हंसीं से ,फिर खिल उठेगा जहाँ मेरा ..
तेरे अक्स में छुपा है कहीं ... मेरा खोया अक्स भी ..
तुझे शायद पता नहीं ..
मुझसे वो,
अलहदा हो बैठा था जो नूर मेरा ..
आज,
तेरे चेहरे पर फैली इस मुस्कान से ,
फिर रौशन कर रहा है जहाँ मेरा ...!!

नंदिता ( 25/01/12)

meeta ने कहा…

This is a very lovely poem Nandita di . Thanks .

अनुपमा पाठक ने कहा…

हमेशा की तरह सुन्दर कविताओं का संकलन!!!

Leena Alag ने कहा…

@Nandita ji...absolutely awesum poetry...
"तेरी इस मासूम सी हंसीं से ,फिर खिल उठेगा जहाँ मेरा ..
तेरे अक्स में छुपा है कहीं ... मेरा खोया अक्स भी ..
तुझे शायद पता नहीं ..
मुझसे वो,
अलहदा हो बैठा था जो नूर मेरा ..
आज,
तेरे चेहरे पर फैली इस मुस्कान से ,
फिर रौशन कर रहा है जहाँ मेरा ...!!"
bahuuuuut khoobsurat.....:)

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

एक ही बार में इतनी रचनाएं !!!

induravisinghj ने कहा…

सुंदर संकलन,चेहरा ही तो दिखता नहीं खुद।

meeta ने कहा…

काजल कुमार जी - आशा है आप को कवितायेँ पसंद आई होंगी . चिरंतन में हम हर सप्ताह इतनी सारी कवितायेँ ले कर आते हैं . धन्यवाद .


इन्दुरविसिंह जी - हार्दिक आभार .

sangeeta ने कहा…

Mindblowing topic as well as collection of poems. Every one has done a great job. I dont think I can add anything new after reading Leena Alag's views.Congrates to all of you for doing such a great job. Sahitya ki sadhana shayad isi ko kahte hain.

meeta ने कहा…

thank you so much Sangeeta ji !! your words fill us with a zeal to work better . please keep reading us and we will be looking forward to more comments from you .

meeta ने कहा…

@Anupama - Thanks for appreciating and encouraging always .

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