सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

नक़ाबें

नीली, पीली, हरी, गुलाबी
मैंने सब रंगीन नक़ाबें
अपनी ज़ेबों में भर ली हैं
अब मेरा चेहरा नंगा है
बिल्कुल नंगा
अब!
मेरे साथी ही
पग-पग
मुझ पर
पत्थर फेंक रहे हैं
शायद वह
मेरे चेहरे में अपने चेहरे देख रहे हैं


              -  निदा फ़ाज़ली .

1 टिप्पणी:

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" ने कहा…

शायद वह
मेरे चेहरे में अपने चेहरे देख रहे हैं
un jaisaa hee dhoondh rahe hein

haqeeqat

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