रविवार, 27 जनवरी 2013

गालियाँ .

ड्रामा कोर्स में
एक वाचाल वैश्या का अभिनय करते हुए
मंच पर मैं बके जा रही थी
माँ - बहन की गालियाँ

पूरी पृथ्वी एक रंगभूमि है
जिसमें पुरुष की यह आम भाषा है
बोलने के लिए जिसे स्त्री को
वैश्या का अभिनय करना पड़ता है .

- सविता भार्गव .

1 टिप्पणी:

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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